Afleveringen
-
Muje tum nazar se gira to rahe ho
muje tum kabhi bhi bhula na sakoge
TRIBUTE TO Mehdi Hasan -
दूर है मेरा भाई मुझसे,वक्त की नज़ाकत इसलिए।।
कभी कभी गुफ्तगू होती है,फोन पर।।
कभी करादर मै हाल चल पूछ लेता हूं ।।
पर जब सामने बैठकर गुफ्तगू होती है।
उसमें अलग जाएका था मोहब्बत का।
जो भाई वाले प्यार फोन पर नहीं होता।
कुछ दिल की बात फोन पर नहीं होता।
वह भाई वाले एहसास फोन पर नहीं होती।
क्योंकि वक्त की नज़ाकत है।। -
Zijn er afleveringen die ontbreken?
-
तेरी नसीहत तेरी अल्फाजों को तेरे तालीम को तेरा हर हर्फ पढ़ाया हुआ मैं मैं फिर से पढ़ाना चाहता हूं।
मैं अपने जीवन में शिक्षक बनना चाहता हूं।
मैं भी गीली मिट्टी को निकालना चाहता हूं।
मैं भी कुछ बच्चों को अंधेरे से निखारना चाहता हूं।
मैं शिक्षक बनना चाहता हूं। Poetry by Sadain Heyat -
ये तुमसे कह दिया किसने
कि तुम बिन रह नहीं सकते
ये दुख हम सह नहीं सकते !!
चलो हम मान लेते हैं,
कि तुम बिन हम बहोत रोये,
कि रातों को नहीं सोये !
मगर अफसोस है जाना,
कि अब के तुम जो लौटोगे,
हमें तब्दील पाओगे !
बहोत मायूस होगे तुम
अगर तुम जानना चाहो
कि एैसा क्यूं किया हमने
तो सुन लो ग़ौर से जाना !
पुरानी अहद-ए-रफ़्ता की
रवायत तोड दी हमने
मुहब्बत छोड दी हमने !! -
niyat-e-shauq bhar na jaaye kahin
niyat-e-shauq bhar na jaaye kahin
tu bhi dil se utar na jaaye kahin
niyat-e-shauq bhar na jaaye kahin -
Muqtida Hasan Nida Fazli, known as Nida Fazli (12 October 1938 – 8 February 2016), was a prominent Indian Hindi and Urdu poet, lyricist and dialogue writer. He was awarded the Padma Shri in 2013 by the government of India for his contribution to literature.
-
निकले घर छोड़ के कि घर बड़ा बनाएंगे।
फर्श चमकदार टोटी वाला नलका लगवागे ।
और कितने समय लगेंगे पहुंचने में |
बहुत लंबा है सफर अब दिखाना चाहता हूँ।
दो इंटे जोड दो , अब मैं घर जाना चाहता Home is not just a house it is a place. A house is just like a shelter where you live but you don't love it. Home is where you love to live in because you have your belongings in it, your toys that you grown up with your childhood memories and many more things. -
अंधेरा खौफनाक बहुत है हयात।
दुनिया का अंधेरा बहुत खौफनाक है आप।
दुनिया के लोग में बहुत ऊंच-नीच अच्छाइयां बुराइयां, जात पात धर्म का बंटवारा है हयात।
पर तू क्यों ना उम्मीद होता .. -
Tribute to Neeraj ChopraTokyo 2020: Neeraj Chopra wins historic athletics gold, India records best-ever Olympic medal tally of 7
-
Globally recognised Feminist activist author poet Kamla Bhasin, written by her, voice SADAIN HEYAT,shares by Dr Kavita Singh
-
ए खुदा तू रमजान की बरकत से सुनता है दुआ।
सुन ले यह दुआ।
मेरे वतन को इस अजाब निजात कर दे।
मुझे दुख नहीं देखी जाती बूढ़े मां की जिसके कांधे पर एक नौजवान बेटा ने अपनी जिंदगी की आखिरी सांस ली।
ए खुदा सुन ले रमजान की बरकत से मेरी दुआ।
ए खुदा तूने सुनेगा तो कौन सुनेगा मेरी दुआ।
मुझे दुख नहीं देखी जाती उस बहन की।
जिस के भाइयों ने अस्पताल में आखरी सांस ली।
मुझे अपने वतन की दुख नहीं देखी जाती मेरे खुदा।
तू रमजान की बरकत से सुन लेना दुआ मेरे खुदा।